Karwa Chauth

पूजा समयः प्रातः काल संकल्प के साथ 

पूजनीय देवी या देवताः गौरीए गणेश 
 
पूजन विधिः व्रत के दिन पहले सायंकाल में गौरीए गणेश व इष्ट देवता से प्रार्थना करें कि हे प्रभु! मुझे इतना समर्थ देना कि मैं निराहार रहकर करवा चैथ के व्रत को सम्पन्न कर सकूं। प्रातः काल नित्य क्रियाओं स्नादि से निवृルा होकर श्रीगणेश गौरी सहित सम्पूर्ण शिव परिवार की पूजा षोड़शोपचार विधि से करें हो सके तो कर्मकाण्ड में निपुण पुरोहित आदि के माध्यम से पूजा सम्पन्न कर फिर करवा चैथ व्रत की कथा सुने। फिर सारा दिन प्रभु का ध्यान व स्मरण करते हुए शांत व प्रसन्न चिルा से बिताएं किसी प्रकार का क्रोध न करें। फिर चंद्रोदय होने पर चंद्र दर्शन कर विधिवत अघ्र्यादि देकर पति का अभिवादन कर जल व फलाहार की वस्तुएं ग्रहण करें। फिर मिट्टी के कलश को जल पूरित करके उसमें करवा के ナपर तिलए चावल एक छोटे से कलश में फल मिष्ठान द्रव्य दक्षिणा सहित श्रृंगार की सामग्री आदि रखकर अपनी सासए जेठानी आदि आदरणीय या बड़े लोगों को ससंकल्प देकर उनका आर्शिवाद प्राप्त करें। इस त्यौहार में सौभाग्यवती स्त्रियां विधिवत श्रृंगार कर देवालय में भगवान का वन्दन व पूजन करती हैं।

प्रचलित कथाः धर्म ग्रंथो मंे महाभारत में इस व्रत के करने का उल्लेख मिलता है और द्रौपदी ने गृहस्थ की बाधाओं से दूर रहने के लिए इस व्रत को किया था। वैसे इस व्रत के विषय में अनेकों किंवदन्तियां व कहानियां जैसे कि ब्रा・ा कन्या द्वारा बिना अन्नए जल के व्याकुल होने पर उसे उसके स्नेही भ्राताओं ने चंद्रोदय होने के भ्रम में पानी पिलाया दिया था। फलतः उसका पति मृत्यु को प्राप्त हुआ और इसी अवसर पर सम्पन्नता युक्त घर में एक बिना परिवार वाली सौभाग्यवती स्त्री जिसे इस मौके पर ताने मारे गऐ थे वह परेशान होकर जंगल में जाकर रोने लगी तब उसे नाग देवता ने सहयोग दिया और करवा चैथ के अवसर पर उसे नाना प्रकार के उपहार भेंट किए आदि।

चंद्रोदय दिल्लीः बजे चंडीगढ़ः बजे बैंगलोरः बजे बीकानेरः बजे रोहतकः बजे शिमलाः बजे वाराणसीः बजे

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Colonel Piyush Sethi